Sunday, September 5, 2010

मधुवन नहीं रहा!


बढ़ता गया मकाँ लेकिन आँगन नहीं रहा,
पल भर जो दे सुकूँ वो दामन नहीं रहा.

दिल की ज़मीन अब तक सूखी ही पड़ी है,
लगता है अबकी रुत में सावन नहीं रहा.

इतने फरेब देखे दुनिया की राह में,
अपना कहे किसी को वो मन नहीं रहा.

हर शख्स ने चेहरे पे मुखौटे लगा लिए,
जो सच बता सके वो दर्पन नहीं रहा.

मायूस होके महफ़िल से लौटे हैं शेख जी,
हसरत है लेकिन क्या करें जोबन नहीं रहा.

इस तरह आदमी ने अपनी बढाई नस्ल,
गोपी हैं, ग्वाल हैं लेकिन मधुवन नहीं रहा.

----------------उमेश------------------------

14 comments:

  1. कमाल की ग़ज़ल कही है उमेश जी अपने जो शे'र पसंद आये
    दिल की ज़मीन अब तक सूखी ही पड़ी है,
    लगता है अबकी रुत में सावन नहीं रहा.

    इस तरह आदमी ने अपनी बढाई नस्ल,
    गोपी हैं, ग्वाल हैं लेकिन मधुवन नहीं रहा.

    मतला भी बेहतरीन है...लिखते/कहते रहें|

    word verification ki deewar hata den...comments me suvidha rahegi.

    ReplyDelete
  2. बढ़ता गया मकाँ लेकिन आँगन नहीं रहा,
    पल भर जो दे सुकूँ वो दामन नहीं रहा.

    इस तरह आदमी ने अपनी बढाई नस्ल,
    गोपी हैं, ग्वाल हैं लेकिन मधुवन नहीं रहा.

    बहुत बेहतरीन गजल कही है...

    ReplyDelete
  3. बहुत बेहतरीन गजल कही है|

    ReplyDelete
  4. बढ़ता गया मकाँ लेकिन आँगन नहीं रहा,
    पल भर जो दे सुकूँ वो दामन नहीं रहा.
    बेहतरीन गजल

    ReplyDelete
  5. ब्लाग जगत की दुनिया में आपका स्वागत है। आप बहुत ही अच्छा लिख रहे है। इसी तरह लिखते रहिए और अपने ब्लॉग को आसमान की उचाईयों तक पहुंचाईये मेरी यही शुभकामनाएं है आपके साथ
    ‘‘ आदत यही बनानी है ज्यादा से ज्यादा(ब्लागों) लोगों तक ट्प्पिणीया अपनी पहुचानी है।’’
    हमारे ब्लॉग पर आपका स्वागत है।

    मालीगांव
    साया
    लक्ष्य

    हमारे नये एगरीकेटर में आप अपने ब्लाग् को नीचे के लिंको द्वारा जोड़ सकते है।
    अपने ब्लाग् पर लोगों लगाये यहां से
    अपने ब्लाग् को जोड़े यहां से

    ReplyDelete
  6. भाई,
    बात अच्छी बन पड़ी है !
    'वो दर्पण नहीं रहा....'
    उस शीशे के चटखने की आवाज़ सर्वत्र सुनाई पड़ती है अब तो !...
    ब्लॉग-जगत में आपका स्वागत है !
    आनंद.व्. ओझा.

    ReplyDelete
  7. ब्‍लागजगत पर आपका स्‍वागत है ।

    किसी भी तरह की तकनीकिक जानकारी के लिये अंतरजाल ब्‍लाग के स्‍वामी अंकुर जी,
    हिन्‍दी टेक ब्‍लाग के मालिक नवीन जी और ई गुरू राजीव जी से संपर्क करें ।

    ब्‍लाग जगत पर संस्‍कृत की कक्ष्‍या चल रही है ।

    आप भी सादर आमंत्रित हैं,
    संस्‍कृतम्-भारतस्‍य जीवनम् पर आकर हमारा मार्गदर्शन करें व अपने
    सुझाव दें, और अगर हमारा प्रयास पसंद आये तो हमारे फालोअर बनकर संस्‍कृत के
    प्रसार में अपना योगदान दें ।
    यदि आप संस्‍कृत में लिख सकते हैं तो आपको इस ब्‍लाग पर लेखन के लिये आमन्त्रित किया जा रहा है ।

    हमें ईमेल से संपर्क करें pandey.aaanand@gmail.com पर अपना नाम व पूरा परिचय)

    धन्‍यवाद

    ReplyDelete
  8. दिल की ज़मीन अब तक सूखी ही पड़ी है,
    excellent expression

    ReplyDelete
  9. उमेश जी बधाई आपको इस बेहतरीन विचारोद्वेलक ग़ज़ल के लिए.

    ReplyDelete
  10. शानदार गजल के लिए आपको अशेष शुभकामनायें ........!!

    ReplyDelete
  11. हिंदी ब्लाग लेखन के लिए स्वागत और बधाई
    कृपया अन्य ब्लॉगों को भी पढें और अपनी बहुमूल्य टिप्पणियां देनें का कष्ट करें

    ReplyDelete
  12. हिंदी ब्‍लॉग जगत में आपका स्‍वागत है .. नियमित लेखन के लिए शुभकामनाएं !!

    ReplyDelete
  13. ateew sunder...............kya baat....kya baat........kya baat............

    ReplyDelete